Tuesday, September 13, 2022

क्या अंग्रेजी में अभिवादन करना उचित है?

सम्प्रति अभिवादन हेतु गुड मॉर्निंग,गुड ऑफ्टरनून, गुड इवनिंग,गुड नाईट इत्यादि शब्दों का चलन चरम पर है। इन तमाम शब्दों में एक शब्द "गुड नून" भी है, किन्तु न जाने क्यों इस शब्द से लोगबाग मुँह फेर लेते हैं! गुड ऑफ्टरनून के पहले आने वाले इस बेचारे निरीह शब्द को भला क्यों नहीं बोला जाता! 
अच्छा,इन शब्दों का प्रयोग करने वालों के सम्मुख एक बड़ी कठिनाई यह होती है कि उन्हें इनके प्रयोग पर उतना ही ध्यान केंद्रित करना पड़ता है, जितना कि किसी शोरूम में लगे पारदर्शी दरवाजे पर लिखे पुश और पुल को पढ़ने में!  उक्त शब्दों को बोलने से पहले उसे समय का भान करना पड़ता है।
अंग्रेजी और अंग्रेजी मीडियम संस्थानों की यह प्रथा    इस कदर हावी है कि लोग अभिवादन का महत्त्व विस्मृत कर बैठे! भारतीय संस्कृति एवं सनातन व्यवस्था में प्रणाम,नमस्ते आदि शब्दों के प्रयोग के बदले व्यक्ति को आशीष प्राप्त होता है, किन्तु अंग्रेजी के इन शब्दों को बोलने से बदले में इन्हीं शब्दों का पलटवार होता है,न कि आशीर्वाद लब्ध होता! भारतीय संस्कृति एवं हमारे शास्त्र सिखाते हैं कि प्रातःकाल उठकर बड़ों को प्रणाम निवेदित करना चाहिए। तुलसीदास  ने तभी तो लिखा कि-
प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।

सोचिए,यदि कोई इस चौपाई को नकारकर प्रातः काल उठकर पितरौ एवं गुरु को उपर्युक्त अंग्रेजी-शब्द बोले तो क्या बदले में उसे आशीर्वाद मिल सकेगा? नहीं.. कभी नहीं। मैंने काफ़ी हद तक अपने विद्यार्थियों की इस आदत को  क्षीण किया है। मैं उनसे कहता हूँ कि इतने सारे शब्दों को याद रखने से अच्छा है, प्रणाम या नमस्ते बोला जाए! न शब्दों का भार, न समय देखने की झंझट!
                        ✍️ अनुज पण्डित

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